PAINT AUR PAIJAME KI MOHRI CHADAKAR KE NAMAZ PADHNA

*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*

👖 *पेंट और पैजामे की मोरी चढ़ाकर (Fold) करके नमाज़ पढ़ना ?*
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🧠 👉कुछ लोग टखनों से नीचे लटका हुआ पाजामा और पेंट पहनते हैं, अगर उन्होंने इसकी आदत डाल रखी है, और तकब्बुर और घमंड के तौर पर वह ऐसा करते हैं तो यह नाजायज़ और गुनाह है, और इस तरह नमाज़ मकरूह है। लेकिन अगर इत्तेफाक़ से हो या बेख़याली या बेतवज्जोही से हो तो हर्ज नहीं, और जो लोग इससे बचने के लिए और टखने खोलने के लिए मोरी नीचे को चढ़ाते हैं वह गुनाह को घटाते नहीं बल्कि बढ़ाते हैं, और नमाज़ में खराबी को कम नहीं करते बल्कि ज्यादा करते हैं, यह पैंट और पजामें की मोरी या पाएंचे को लपेट कर चढ़ाना नमाज़ में मकरूहे तेहरीमि है।

📚 *हदीस में है:-* रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलेही वसल्लम ने फरमाया कि मुझे हुक्म दिया गया कि मैं 7 हड्डियों पर सजदा करूं, पेशानी, दोनों हाथ, दोनों घुटने, और दोनों पंजे, और यह हुक्म दिया गया कि मैं नमाज़ में कपड़े और बाल को ना समेटू।
📚 *(बुख़ारी-ओ-मुस्लिम, मिश्कात सफ़्हा 83)*

🌴 इस हदीस की रोशनी से कपड़ा समेटना और चढ़ाना नमाज़ में मना है, लिहाज़ा पेंट और पाजामे की मोरी लपेटने और चढ़ाने वालों को इस हदीस से इबरत (सबक़) हासिल करना चाहिए। लेकिन इस्लाह करने वालों से भी गुज़ारिश है कि नमाज़ में इस किस्म की कोताही बरतने वालों को नर्मी और प्यार, मोहब्बत से समझाएं मान जाए तो ठीक वरना उन्हें उनके हाल पर रहने दे, और मुनासिब तरीक़ै से इस्लाह करें उनको डांटना झिड़कना और उनसे लड़ाई झगड़ा करना बहुत बुरा है, जिसका नतीजा यह भी हो सकता है कि वह मस्जिद में आना और नमाज़ पढ़ना छोड़ दें जिसका वबाल उन झिड़कने वालों पर है। क्योंकि इसमें भी कोई शक नहीं कि बाअज़ इस किस्म की खामियों के साथ नमाज़ पढ़ने वाले,,,, बे नमाजियों से हज़ारों दर्जा बेहतर हैं। और नमाज़ में कोताहियां करने वालों को चाहिए अगर कोई उनकी इस्लाह करे तो बुरा मानने के बजाय उसकी बात पर अमल करें उस पर गुस्सा ना करें, क्योंकि वह जो कुछ कह रहा है आपकी भलाई के लिए कह रहा है अगर वह तुर्शी और सख़्ती से भी कह रहा है तो वह उसका फेल (काम) है, आपका काम तो हक़ को सुनकर अमल करना है झगड़ा करना नहीं।✍

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