BESHK KHWAJA GAREEB NAWAZ NE HAME IMAAN DIYA

*बेशक ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ ने हमें ईमान दिया है पर आला हज़रत ने हमारा ईमान बचाया है।*

_*बात सोचने वाली.....*_

*अगर कलम उठा है हर दौर में तो देखा गया है बरेली को*

*वहाबी आगे आए तो आला हज़रत ने कलम उठाया।*

*नसबंदी का मसला आया तो हुज़ूर मुफ्ती ए आज़म हिन्द ने कलम उठाया।*

*सुल्हे कुल्ली ख़बीस का मसला आया तो हुज़ूर ताजेशरीअ़त ने कलम उठाया।*

*और आज तीन तलाक़ का मसला आया तो हूज़ूर असजद रज़ा क़ादरी ने कलम उठाया।*

*और बातिल फिर्क़ो ने उसे मान लिया पर शेर ने कहा ऐसे बिल मेरी जूती की नोक पर*

*हर वक़्त आला हज़रत ने हमारा ईमान बचाया है उनके खानदान का सुन्नियों के ऊपर एहसान है।*✍

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